खादी स्वदेशी का सार हैं ……

खादी केवल एक कपडा नहीं बल्कि यह एक परिक्रिया हैं, जो गाँधी जी द्वारा चलायी गयी थी| यह एक विचारधारा हैं, जिसमें सभी भारतीयों को आत्मनिर्भर बनाने का बढ़ावा दिया गया|

गाँधी जी ने लिखा था “स्वदेशी के बिना स्वराज एक लाश हैं और अगर स्वदेशी स्वराज की आत्मा हैं, तो खादी स्वदेशी का सार हैं|

mahatma-gandhi272__2042372238

खादी केवल एक क्रांति का चिन्ह नहीं, बल्कि भारतीयों की पहचान हैं| खादी भारतीय संस्कृति का एक अविभाज्य हैं|

 

 

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s